जीवन कैसे जिया जाये

किसी ने क्या खूब लिखा है लिखने वाले ने , " सोते तो तब थे जब माँ सुलाती थी , अब तो बस थक कर गिर जाता हु।  आज की जिंदगी को देख कर हसी आती है क्या इसी का नाम जीवन है , क्या यही सब करना ही हमारा उद्देश्य है।  या हम अपने मार्ग से भटक गए है। 
                        अपनी दिन चर्या के अनुरूप अपने आप से पूछिए , कि जो हमारी जीवन शैली है, क्या इसी का नाम जीवन है, जवाब में न ही मिलेगा।  जिसका एक मात्र कारण समय का अभाव है घर में खुशिओं का सब साजोसामान इकक्ठा कर लिया और परिवार के साथ बैठ कर हसने का वक्त नहीं।  आधुनिकता की अंधी दौड़ में भागते भागते हमारे संस्कार, हमारी विद्या , हमारे परिवार , स्वास्थ्य , सुख, चैन सभी कुछ तो चला गया सकून से रहने  के चक्कर में लेकिन सकूं तो क्या हमारी तो नींद भी चली गयी यदि हाथ में कुछ आया भी तो संस्कारो की जगह आधुनिकता, विद्या की जगह शिक्षा, घर की जगह मकान और स्वास्थ्य का स्थान मेडिकल पॉलिसी ने ले लिया।  मकान के साथ साथ दिल भी छोटे हो गए विचार भी दूषित हो गए जिसका परिणाम हमारे सामने है।  
               आज के परिवेश में मानव का स्तर पशु से ज्यादा निचले स्तर पर आ गया है।  क्या आप ने कभी सुना कि आज तक किसी बन्दर की हार्ट अटैक से मृत्यु हुई हुई हो , या किसी गाय भैस की आँखे कमजोर हो गयी, हो, या कोई कुत्ता लकवे का शिकार हुआ हो नहीं न।  
                  कुत्ते जैसे पशु तो सम्भोग भी वर्ष में एक बार ही करते है।  
                       कुदरत ने मनुष्य को इस सृष्टि का राज कुमार बना कर भेजा था , सभी कुछ दिया परन्तु विडंबना देखिये हमने वस्तुओ का दुरूपयोग करना सिख लिया जैसे तरकारी दी हमने तेज़ मिर्च मसाले दाल कर सरे विटामिन्स मार कर खाना सीख लिया।  पैन मसाले, तम्बाकू ,शराब  मॉस न जाने क्या क्या खाना सीख लिया।  
  हम तो वो ही खाएंगे जो हमारी जीभ कहेगी। पशु पक्षी आज भी  बिना अलार्म के सुबह उठ जाते है टाइम से सो जाते ह टाइम से सो जाते है क्या आप ने कभी सुना की अमुक भैस ने आज रात को देर से सोने के कारण  सुबह  दूध नहीं दिया या रात को कौओ ने खूब कॉव कॉव  की। या किसी घोड़े का ब्लड प्रेशर काम या ज्यादा हो गया।  सबका अपना नियम है कोई भी अपना नियम नहीं तोड़ता 
                  आज घरो में से संस्कार ख़त्म हो गए। आधुनिकता के नाम पर लोग नकली जीवन जीने लगे है , महा नगर ऐसे परिवारों से भरे परे है जिन्होंने अपनी आधुनिकता का प्रदर्शन करने के लिए लोन लिए हुए है और क्रेडिट कार्ड आदि की किस्तों को भरने की चिंता में अपनी सेहत और सुख दोनों ख़राब कर रहे है परिवारों में बिखराव हो गया बस सब एक अंधी दौड़ में भाग रहे है  जाना कहा है किसी को कुछ नहीं पता , जो पास में नहीं है उस को हासिल करने के प्रयासों में जो कुछ पास में है, उसका भी आनंद नहीं ले पा रहे।  
            जो दिल में आया खा लिया, जब दिल किया सो गए सब दिल किया जाग गए एक दिशा हीं जीवन।  
 आप को याद होगा मैने कुछ दिन पहले फेस बुक के माध्यम से एक प्रश्न पूछा था।  कि आज कल आचार्य विनोबा भावे , स्वामी विवेकानन्द सरीखे महापुरुष पैदा होने क्यों बंद हो गए  महापुरुष संस्कारो से बनते है जो अब परिवारों से प्रायः लुप्त होते जा रहे है। अतः खुद भी संस्कार वान बने और बालको भी संस्कार वान बनाये।
              मेरा आप से अनुरोध है, कि आप हसती  हसाती ज़िंदगी जिए खिलती खिलाती ज़िंदगी जिए।  
  गलत आचरण और गलत आदतों से बचें। अच्छा साहित्य अध्यन करें थोड़ी समाज सेवा में भी रूचि रखे आप को मानसिक शांति मिलेगी।  रोज़ एक नेक काम ज़रूर करें चाहे कुछ भी हो मगर होना निःस्वार्थ चाहिए।  परिवार को समय ज़रूर दें।  गलत खान पान और गलत रहन सहन आप की सेहत और सुख चैन ख़त्म कर देगा। यदि कभी क्रोध करना भी हो तो केवल गुस्से का अभिनय ही करे दिल से नहीं। 
                 अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी के साथ पालन करे और अपनी जिम्मेदारियों का पालन पूरी लगन के साथ।  
शेष फिर.-----------
  

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